Muhurta Cintamani · Chapter 6
93
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1
विवाहप्रकरण
70.
भार्या त्रिवर्गकरणं शुभशीलयुक्ता शीलं शुभं भवति लग्नवशेन तस्याः ।
तस्माद्विवाहसमयः…
2
सुशीला स्त्री धर्म, अर्थ और काम की वृद्धि करती है, और स्त्री की
सुशीलता विवाहकालिक लग्न के अधीन है, …
3
।
विवाहकारक अन्य योग
विषमभांशगतो शशिभागंवो तनुगृहं बलिनौ यदि पश्यतः ।
रचयतो वरलाभमिमो यदा युगलभांश…
4
अन्वमः--यदि बलिनो शशिभागंवोौ विषमभांशगतो तन्गहं प्रश्यतः (तदा) वरलाभं
काकक
+ल्का
नाल
>राहान+
लनकी…
5
।
कुलटा वा मृतवत्सायोग
प्रश्नतनोयंदि पापतभोग: पत्चमगो रिपुद्ष्टशरीरः ।
नीचगतइशच तदा खलु कन्या सा क…
6
विवाहभड्भयोग
यदि भवति सितातिरिक्तपक्षे तनुगहतः समराशिगः शशाडूः: ।
अशुभखचरबीक्षितो5रिरन्ध्रे भवति वि…
9
अन्वयः--तक्न प्रश्नलग्नक्षणे चेत् स्वेच्छया यादृशापत्ययुक् कामिनी आत्रजेत् तदा
कन्यका वा सुतः ताद…
10
अन्वयः--प्रश्नलग्नक्षण शंखभेरीविपञ्ची
रब:मज्भलं जायते ।वायसः वा खर: श्वा
श्रुगाल: अपि यदि रौति वा ना…
11
अन्वयः--विश्वस्वातीवेष्णवपूर्वात्तियमैत्रें: वस्वाग्नेये: वा करपीडोचितऋ्षे: हि
(निश्चयेन) आदौ वस्त्र…
12
।
१०४
मुहत्तंचिन्तामणि
विवाहकाल में ग्रहशुद्धि
गुरुशुद्धिशेन कन्यकानां समवर्षेषबु षडब्दकोपरिष्टा…
13
।
विवाह के महीने
मिथुनकुम्भमृगालिवृषाजगे सिथुनगेडपि रवो त्रिलवे शचे: ।
अलिसृगाजगते करपीडनं भवति कार…
14
।
मिथुन, कुम्भ, मकर, वृश्चिक, वृष और मेष राशि में सूर्य के रहते
विवाह शुभ होता है । परन्तु मिथुन रा…
15
अन्वयः--जन्ममासभतिथौ आद्यगर्भसुतकन्ययो: द्यो: करग्रह: न उचित: । चेत्
द्वितीयजनूषो: सुतकन्ययो: (करग…
17
अन्वयः--सुतपरिणयात् षण्मासान्त: सुताकरपीडनं न, च तद्गवत् निजकुले मण्डनात्
मुण्डनं आप न, च(तथा) सह…
18
अन्वयः--वध्वा: अपि वा वरस्य तिपूरुषे कुले, निश्चयोत्तरम्,यदि कश्चन नाशं
ब्रजेत् तत्र मासोत्तरं विव…
19
।
किसी का विवाह होने के बाद छः महीने के भीतर उसी कुल में तीन
पीढ़ी के अन्दर किसी का मुण्डन और यज्ञोप…
21
अन्वयः--अहिजौ कन्यासुतौ सुतरां श्वश्रविनाशं विधत्त:., च निऋतिजोौ कन्यासुतो
एवश्रं हतः,
ज्येष्ठाभजात…
22
वर्णकूट
द्विजा झषालिककंटास्ततो नपा विशो5डिसप्रजा: ।
वरस्य वर्णतोषईधिका बधून शस्यते बुधः ॥ २२७
अन्वयः…
23
वर्णबोधक चक्र
वदयक्ट
हित्वा मृगेन्द्र नरराशिवश्या: सर्वे तथषां जलजास्तु भक्ष्या:।
सर्वेषपि सिहस्य …
24
।
सिंह राशि को छोड़ अन्य सब राशियाँ मनुष्य राशियों के अर्थात् मिथुन,
कम्या, तुला के वश में हैं; ज…
25
मुहत्तचिन्तामणि
११०
यो:
अन्वयः--अश्विन्यम्बुपयो: हयः निगदितः । स्वात्यकंयो: कासरः, वस्वजपाड्ध
सिंह…
27
।
योति,.
अद्विनी और शतभिष घोड़ा योनि, स्वाती और हस्त भंसा
योनि,
_ ध्निष्ठा और पूर्वाभाद्रपद सिंह य…
29
अन्बयः--य्रुमणे: [सूर्यस्यथ] कुजेज्यशशिन:ः मित्नाणि, शुक्राकंजौ वैरिणौं, सौम्य:
अस्य सम: । विधो: बूध…
30
अन्वयः--म घाहिवस्विन्द्रमलवरुणानलतक्षराधा
पूर्वोत्तरात्रयविधात॒यमेशभानि
मैत्रादितीन्दुहरिपौष्णममरु…
31
भक्ट
मृत्यु; घट्काष्टके ज्ञेयो5पत्यहानिनं वात्मजे ।
हिर्हादश निर्धनत्वं दयोरन्यन्न सौख्यकृत् ॥ ३१ …
32
पूर्व कहे हुए षट्काष्टकादि दुष्ट भकूट के रहते भी यदि कन्या-जन्मराशि
और वर-जन्मराशि का स्वामी एक ही ह…
33
११ढ
मुहत्तचिन्तामणि
हार
दुष्ट गणकट, भक्ूट और ग्रहकूट का परि
ाद्गणानां न दोष: ।
सेत्रयां राशिस्वामिन…
34
।।
आठ कटों में सबसे प्रधान नाड़ीकूट
चेकनाडी
ज्येष्ठारौद्रायमाम्भ: पतिभयुगयुग॑ दास्रभ
न्ये च मध्या …
35
दम्पत्योरेकनाड्यां परिणयनमसन्मध्यनाडस
दास्रभ॑ च एकनाडी | पुष्यन्दुत्वाष्ट्रअस्बय: ज्थेष्ठारौद्रायमाम…
36
।
अ० क० च० ट० त० प० य० श०
ये आक वरगे हैं। इनमें गरुड़ का
अवर्ग, बिलार का कवर्गं, सिंह का चवर्ग, क…
37
।
राशियों के स्वामी
चन्धज्ञा: कविभौमजीवशनिसौरयो गुरुः ।
कुजशुक्रसौम्यशशिसूर्य
इह राशिपाः क्रियमृगास…
38
।
नवांश चक्र
......
कनिनिनिककिकीनि कल
-अनननननननननमननननननननन. नन ओओ> | न्न्ओड,,स न
6ैणनननममकमकन७9०…
39
।
अन्वय:--समगृहमध्ये (क्रमेण) शशिरविहोरा
रविशशिनो: (क्रमेण ) ज्ञेया || ३८ ।।
(भवत्ति) विषमभमध्ये सा…
40
।
द्रेष्काण चक्र
द्वादशांश विधि
स्थादद्गादशांश इह राशित एव गेहूं
होराथ दृकक््कनवमांशकसूयय भागाः …
41
नक्षत्रों की पूर्वांयोगि आदि संज्ञा और उनका फल
पौष्णेशशाक्राद्रससुर्य नन््दा:
पूर्वाद्धमध्यापरभाग…
43
।
अन्वयः--भृत्यधनिभत् पुरादिसद्भांत् पूर्व चेत् (यदि) सेव्याधमर्णयुवतीनगरादिभ॑ (भवंत्) तदा सेवाव…
44
ज्येष्ठा, रेवती और आइलेषा में अन्त के दो दण्ड तथा मूल, अद्विनी और
मघा में आदि के दो दण्ड गंडान्त कह…
45
पापयदि पापग्रह मार्गीं होकर लग्त से बारहवें स्थान में और दूसरा
कहते
ग्रह वक्री; होकर लग्न से दूसरे …
46
अन्वयः--अन्त्यादितिवक्लि पित््यभे खरामत:, के खबेदत:, सार्पभे रदत:, अश्वे
खबाणतः, अयमाम्बूपे धृतितः,…
49
।
रेवती, पुनवंसु; क्ृत्तिका और मघा में तीस दण्ड के बाद चार दण्ड
विषघटी होता है । रोहिणी में चालीस दण…
52
दिन के पन््द्रह मुहृत्त
गिरिशभुजगसित्रा: पितन्यवस्वस्बुविदवे-
अल
हार
इभिजिदय च विधातापोन्द्र इन्द…
53
।
दिन का जितना मान हो उसमें पन्द्रह का भाग देने से जो दण्ड पल
लब्ध हों वही एक मुहूर्त्त का मान होत…
54
आदित्यादि वारों सें निषिद्ध महत्त
रवावयंमा ब्रह्मरक्षश्च सोमे कुजे वह्लिपिश्ये बुधे चाभिजित्स्यात् …
55
।
रविवार में अरयमा नामक मुह॒त्तं, सोमवार में ब्रह्म और राक्षस दो
मुहत्तें, मज्जल में अग्नि और पितर …
56
।
ग्रहों द्वारा नक्षत्रों का वेध
वेधोउन््योन्यमसी विरिड्च्यभिजितोर्याम्यानुराधकक्षेयो-
बिश्वेन्द्…
57
।
सप्तशलाका चत्र में ग्रहों हारा नक्षत्रों का वेध
शाक्रेज्ये शझतभानिले जलशिवे पौष्णायंमक्षें वसुदी…
59
।
।
जातेहैंहैं।..
कहेजाते
पापप्रह कहे
तथापापभ्रह
क्रतथा
येक्रर
कैतु ये
ओरकैतु
राहुऔर
शनैश्चर, राहु
म…
60
अन्वय:--मे घादिगे अर्क अष्टशरां: नगाक्षा: सप्तेषव:, सप्तशरा:, गजाक्षा:, गो5क्षा:,
खतर्का:, कुरसा:, …
62
।
एकागंल दोष
परिघातिगण्ड ।
व्याघातगण्डव्यतिपातपू्वंशलान्त्यवप्त्े..
योगे विरुद्धे त्वभिजित्समेलः खा…
63
च्त८७.4
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) विरुद्ध
अन्वयः--व्याघातगण्डव्यतिपातपूर्वशल…
64
॥।
अन्वयः--पातोपग्रहलत्तासु खेटपत्समः अंधिि: नेष्ट: स्यात्। (अथ ) वार: त्विध्नः
अष्टनि: तष्ट: संक: …
65
अशुभ अद्धयाम चक्र
न
दिन
शुक्रवार |शनेश्चर
ि |य
्
|बृहस्पत
न
र | बुधवार
| मंगलवाध
्ग
सोमवार
व्पम
'उन…
66
।
अन्वयः--रवे: [सकाशात् क्रमेण ]शक्राकंदिग्वसुरसाब्ध्यश्विन: तिथ्यंशाः |मुहूर्त्ता: |
ें:)
कुलिका: …
67
।
धनु-मीनादि राशियों में सूर्य केस्थित रहते द्वितीयादि सम तिथियाँ
दग्धसंज्ञक होती हैं, अर्थात् धनु…
68
अन्वयः--लग्नात् (वा) चन्द्रात् मदनभवनगे किवा बाणाशुगमितलवगे खेटे (सति)
जामित्न स्थात्, इह परिणयन…
69
।
कुरु और बाह्लीक, इन पश्चिम के देशों में उपग्रह दोषयुक्त नक्षत्र का;
कलिज् और बज्भ, इन पूर्व के द…
70
दश दोष
शशाडूसूरययक्षयुतेभंशेष॑ खे॑ भूयुगाड़्रानि दशेशतिथ्यः ।
नागेन्दवो ड्ेन्द्रुमिता नखाइचे:्धूवन्…
71
।
दशयोग
उक्त दश दोषों का फल
वाता भ्राग्निस
पच्चो ही
रमरणं रुग्वज्ञवादा: क्षति-
क्
योगाडू: दलिते…
72
अन्वयः--याततिथ्य: लग्नेन आढ्या: अंकतष्टा: नागद्बबब्धितकेंन्दुसंख्ये शेषे (सति
क्रमंण) रोग:, वह्निः, …
73
अन्य बाणदोष
रसगुणशशिनागाब्ध्याब्चसंक्रान्तियातांदशकसमितिरथतष्टाडूयंदा पत्च शंषाः:।
रुगनलनपचोरा मृत्…
74
।
बाणदोष का परिहार
राज्रौं चौररुजों दिवा नरपतिवंह्लिः सदा संध्ययोमत्युइचाथ दानौ नुपो विदि मृतिभौ मे…
75
।
चोर और रोगबाण रात्रि में, राजबाण दिन में, अग्निबाण सब काल
में और मृत्युबाण प्रातः: तथा सायद्छाल क…
76
।
सब ग्रह अपने स्थान से तीसरे-दशवें, पाँचवें-नरवें, चौथे-आठवें और
सातवें स्थान को पादवृद्धि से देखत…
77
!
लग्न से सातवें भाव की शुद्धि
।
लवेशो लवं लग्नपो लग्नगेहं प्रपश्येन्मियो वा शुभ स्पाहरस्य
॥ ७७॥
78
।
लवडूनपों5शं द्युनं लग्नपो5स्त॑ सिथो वेक्षते स्याच्छुूभं कनन््यकाया:
प्रपश्येत् (तदा)
अन्वयः--लव…
80
विषुव अर्थात् तुला और मेष, अयन अर्थात् कर्क और मकर की संक्रान्ति
जिस दिन हो वह दिन और उससे एक दिन …
81
पंगु-अन्धादि लग्नदोष
घौर्र तुलाली बधिरो मृगाइवो रात्रो च सिहाजवुषा दिवान्धाः ।
कन्यान॒युक्ककंटका नि…
82
अन्बयः--घस्रे [दिने] तुलाली बधिरो
[भवेताम् |, रात्रौ मृगाश्वो वधिरौ
#एक राशि से दूसरी राशि में ग्…
83
।
(भवन्ति) तु पुनः मृगकुम्भान्तिमभानि सन्ध्ययो:
धनु, तुला और वृश्चिक ये लग्नें दो पहर के बाद बहिरी…
84
।
रतनौ (विवाहे) दारिद्रबं स्यात्, दिवान्धलग्ने वंधव्यम्, निशान्धअन्वयः--बधि
लग्ने शिशुमरणम्, पर्व…
85
अन्वयः--कार्मुकतौलिककन्यायुूंग्मलवे वा झषगे (लवे) यहि उपयामः भवेत् तहि
(सा) कन्या खलू् [निश्चयेन …
86
अन्वयः--इह वर्गोत्तमं हित्वां अन्त्यनवांशे काचन (कन्या )न च परिणेया, तौलमृगस्थे
शशिभूृति चरलग्ने चर…
87
।
अन्वयः--शनिः व्यये, अवनिज: खे, भगृ: तृतीये, चन्द्रखला: तनों न शस्ता: । लग्नेट्
कवि:, ग्लौं: रिपौ…
88
कतंरी आदि महादोषों का परिहार
पापौ कतंरिकारकौ रिपुगहे नीचास्तगो कतंरीदोषो नव सितेषरिनीचगहगे तत्षष्ठदो…
89
अन्वय+--कतंरिका
रकौ पापौ (यदि) रिपुगृहे (वा) नीचास्तगो (तदा) कतंरी-
दोषो नैव (भवति), अरिनीचगुहंगे स…
90
अन्वयः--विद्गुरुसितेषु केन्द्रकोणे (स्थितेषु) इह अब्दायनर्तृतिथिमासभपक्षदग्धतिथ्यन्धकाणबधिरांगमुखा: …
91
अन्बय:--जीवे केन्द्रे वाकोणे, वा रवौ आये, वा लगने वर्गोत्तमें, अपि वा चन्द्र
ा:
नर्गोत्तमे [स्थिते] …
92
।
लग्न का विशोपषक बल
दौ दो ज्ञभुग्वोः पच्चेन्दो रवो साद्धत्रयो ग्रुरो ।
रामा मन्दागुकेत्वारे साद्ध…
93
अस्वयः--ज्ष भ्ग्वो:द्वौ दो, इन्दौ पञ्च, रवो सार्धत्रयः, गुरौ रामः, मन्दागुकेत्वारे
सार्ैकेकं विशोपका…
94
अन्वयः--कष्णे पक्षे अपि च सौरिकुजाक वारे वर्ज्यें नक्षत्रे वा यदि संकीर्णानां
करपीडा स्यात् (तदा) स…
95
।
कृष्णपक्ष में, शर्नेंब्चर, मंगल वा रविवार में, और विवाह में वर्जित
नक्षत्रों मेंयदि संकर वर्णों क…
96
अन्वयः--गान्धर्वादिविवाहे त्रिपद्यां अर्कात् (अकंनक्षत्रात्) वेदनेत्रगूणेन्दवः कुयुगांगाग्निभ्रामा…
97
।
पृ्व॑ सिदमाचरेत्त्रिनवषण्मिते
अन्वयः--विधोः: बल॑ अवेक्ष्य विवाहजिहितोड़भि: दलनकण्डनं वारक गहाड्भरण…
98
घर के बायें भाग में हाथ भर ऊँची, हाथ भर लम्बी और हाथ भर
चौड़ी वेदी बनाना चाहिए, और विवाह के दिन से छ…
99
दल
वृष
मिथुन
फर्क
आग्नेय
गोधूलिप्रशंसा
नास्यामृक्ष न तिथिकरणं नव लग्नस्थ चिन्ता
तो वारो न च लव…
100
।
समयभेद से गोधूलिकाल
पिण्डीभूते दिनकृति हेमन्ततो शस्थादर्धास्ते तपसमये गोधूलिः ।
संपूर्णस्ते जलध…
101
अन्बयः--हेमन्ततौ दिनकृति (सूर्य) पिण्डीभूते (सति), तपसमये अर्धास्ते (सति)
जलधरमालाकाले सम्पूर्णास्ते…
102
बृहस्पति के दिन सूर्यास्त होने केबाद और शनेवचर के दिन सूर्यास्त
होने के पूर्व गोधुलि शुभ होती है। ब…
103
अन्वय:--मे घादिगे अर्क अष्टशरां: नगाक्षा: सप्तेषव:, सप्तशरा:, गजाक्षा:, गो5क्षा:,
खतर्का:, कुरसा:, …
104
।
जिस दिन जितने दण्ड-पल पर सूय की संक्रान्ति लगी हो उस दिन
से इष्टकाल पर्यन्त जितने दण्ड-पल हों उनक…
105
अन्वयः-तनो: इष्टांशकात् पूर्व नवांशा: दशसंगृणा: रामाप्ता: लब्धं वर्गादिसाधने
तनो: अंशाद्यं (स्यात्…
106
।
क्
लखनऊ का लग्नसमान
लिन
वृष मिथुन |कके | सिंह
जल
|कन्या गा
न
धनु
मिनिट
|मकर | कुम्भ |5
मीन
२१…
107
अन्वयः--पातदग्धतिथिभि: सह उत्पातान्ू, तथा दुष्टान् योगान् अथ चन्द्रेज्योशनसां अस्तमयनं तथा तिथ्या…