Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 55
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

। रविवार में अरयमा नामक मुह॒त्तं, सोमवार में ब्रह्म और राक्षस दो मुहत्तें, मज्जल में अग्नि और पितर दो मुहृत्त, बुधवार में अभिजित्‌ नामंक मुहत्तें, बृहस्पतिवार में जल और राक्षस दों मुहूर्त, शुक्रवार में ब्राह्म और पितर दो मुहूत्तं, शनेश्चर में महादेव और सर्प दो मुहूर्त निषिद्ध होते हैं । इन दिनों के इन मुहूत्तों में कोई शुभ कार्य न करना चाहिए । इन मुह॒त्तों का और भी यह प्रयोजन है कि किसी कार्य कीआवश्यकता हो और जिस नक्षत्र में उस कार्य के करने को कहा है, वह नक्षत्र उस काल में नहीं हैतो उस नक्षत्र के स्वामी के मुह॒त्त में उसकार्य को कर ले ॥| ५४॥। विवाह के नक्षत्र और अभिजित नक्षत्र कामान निर्वेध:... _ शशिकरमृलमैत्रपित्य- ब्राह्मान्त्योत्तरवनः . शुभो विवाहः। रिक्तामारहिततिथौ शुभेषह्लि वेहवप्रान्त्याड्न्रः श्रुतितिथिभागतो 5भिजित्स्यात्‌ ॥ ५५॥ अन्वयः--निर्वेघिं: शशिकरमूलमैत्रपित्यब्राह्मान्त्योत्त रपवनै:, रिक्तामा रहिततिथौ, शुभे अक्ति, विवाह: शुभ: (स्यात्‌), तथा वैश्वप्रान्त्यांन्नि: श्रुतितिथिभागतः अभिजित्‌ स्यातं ॥। ५५॥। सूर्यादि ग्रहों सेविद्ध* नक्षत्रों कोछोड़ मृगशिरा, हस्त, मूल, अनुराधा, मघा, रोहिणी, रेवती, तीनों उत्तरा और स्वाती नक्षत्र में चोथ, नवमी, -3_> चतुर्दशबअमन ी, अमावासअ्या आयकोपल छोड़ लय अन्य :तिथियो सिथियंोंमें और और:सुभ शुभ दिन दिन अकात, प्रताप त्ञ ू7_ ___ -- में. *वेध का प्रकार आगे कहेंगे । श्श्द मुहत्तचिन्तामणि सोमवार, बुध, बृहस्पति, शुक्रवार में विवाह शुभ होता है। उत्तराषाढ़ नक्षत्र के चौथे चरण से लेकर श्रवण के चार दण्ड बीते तक अभिजित्‌ नाम नक्षत्र कहा जाता है ॥ ५५॥

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