Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 85
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--कार्मुकतौलिककन्यायुूंग्मलवे वा झषगे (लवे) यहि उपयामः भवेत्‌ तहि (सा) कन्या खलू्‌ [निश्चयेन |सती (स्यथात्‌) ॥। 5४ ।। धनु, तुला, कन्या और मिथुन के नवांश में यदि विवाह हो तो कन्या पतिब्रता होती है । ग्रन्थकार ने मीन का नवांश भी विकल्प से शुभ बताया है, किन्तु प्राचीन मुनियों ने मीन का नवांश त्याज्य कहा है ॥। ८४॥। विहित नवांशों में भीकिसी का निषेध अन्त्यनवांशे न च परिणया काचन वर्गोत्तमसिह हिंत्वां । नो चरलग्ने चरलवयोगं तोलिसृगस्थे शहभति कुर्यात्‌ ॥ ८५॥

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