Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 86
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--इह वर्गोत्तमं हित्वां अन्त्यनवांशे काचन (कन्या )न च परिणेया, तौलमृगस्थे शशिभूृति चरलग्ने चरलवयोगं नो कुर्यात्‌ ॥ ८५५ ॥ वर्गोत्तम* नवांश को छोड़ लग्न के अन्त्य नवांश में विवाह न करना चाहिए । जैसे मेष लग्न में धन का नवांश और वृष लग्न में कन्या का नवांश इत्यादि ! तुला और मकर राशि में चन्द्रमा के रहते चर लग्न में चर नवांश का योग न करे, अर्थात्‌ मेष, कर्क, तुला और मकर लग्न में नवांश का योग न करे, अर्थात्‌ मेष, कक, तुला और मकर लग्न में इन्हीं के नवांश में विवाह न करे; क्योंकि ऐसे योग में ब्याही स्त्री पति को छोड़कर दूसरे पुरुष को ग्रहण करती है ।॥।| ८५५ ॥। सर्वथा लग्नभड़ः योग व्यये शनिः खेड्वनिजस्तृतीये भगुस्तनो चन्द्रखझला न शस्ताः। लग्नेटकविग्लोइव रिपौ मृतौ ग्लौलंग्नेट शुभाराइच मदे च सर्वे ॥ ८६॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse