Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 2
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

सुशीला स्त्री धर्म, अर्थ और काम की वृद्धि करती है, और स्त्री की सुशीलता विवाहकालिक लग्न के अधीन है, अर्थात्‌ शास्त्रोक्त शुभ मुहूर्त न हो... अब कोड आन े लीक ७४ $७53.-:3/-4 अब मर में विवाह होता है तो स्त्री कास्वभाव और आचरण अच्छे होते हैं। और उ 3०. क+---+ 3-७ पोडसनक--क <-+-. ता छाती ककका; २३ वा. *७ अटल +मपललकन+ //ध+ ४० ऊ#आकऊत> -+3- यदि अशुभ मुह॒त्ते में विवाह हुआ तो स्वभाव आदि अच्छे नहीं होते । इसलिए विवाह का मुह॒त्त अच्छी तरह विचारना चाहिए। क्‍योंकि सुशीलता, पुत्रप्राप्ति और धर्म, येसब विवाहंकाल के मुहृत्त के अधीन हैं ॥| १॥। विवाह प्रइनविधि आदो संपृज्य रत्नादिभिरथ गणक वेदयेत्स्वस्थचित्त कन्योद्वांं दिगीशानलहयविशिखे प्रइनलग्नाददोन्दुः । दृष्टो जीवेन सद्यः परिणयनकरों गोतुलाककंटाख्य॑ं वा स्यथात्प्रइनस्य लग्नं शुभवचरयुतालोकितं तद्विदध्यात्‌ ॥ २॥ अन्वयः--आदोौ रत्नादिभि: स्वस्थचित्त गणकं सम्पूज्य अथ कन्योद्वाहं वेदयेत्‌ । यदि इन्दुः प्रश्नलग्नात्‌ दिगीशानलहयविशिखे (स्थित:) जीवेन दुष्ट: तदा सद्य: परिणयनकर: स्थात, वा गीतुलाककंटाख्यं प्रश्नस्य लग्नं शुभखचरयूतालोकितं यदि स्यात तदा तद्‌ विदध्यात्‌ ॥ २॥। मणि, सुवर्ण, चाँदी, वस्त्र, फल, फूल आदि से ज्योतिषी पण्डित की पूजा करके प्रइनकर्ता उससे कहे कि कन्या का यह नाम है और वर का यह नाम है, इन दोनों का विवाह योग्य है या नहीं। यदि प्रश्नकालिक लग्न से दशवें, गेरहवें, तीसरे, सातवें वा पाँचवें स्थान में चन्द्रमा स्थित होकर बृहस्पति से दृष्ट हो तो शीघ्र ही विवाह होता है, अथवा वुष, तुला वा कर्क प्रशनकालिक लग्न हो और शुभग्रहों से युक्त वा दृष्ट हो तो भी शीघ्र विवाह होता है ॥ २॥

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