Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 98
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

घर के बायें भाग में हाथ भर ऊँची, हाथ भर लम्बी और हाथ भर चौड़ी वेदी बनाना चाहिए, और विवाह के दिन से छठे दिन को छोड़ सम दिनों में तथा विषम दिनों में पाँचवें या सातवें दिन मंडप का विसर्जन करना चाहिए ।। ९७॥। है हक _ह ३०% _काउ_क का तक लक 7 ए0 कता सहाकरमपा आन विवाहप्रकरण १५१ मंडप के खम्भ गाड़ने का मुहत्त सुय5ज्भनासिहधटेष॒ हब स्तम्भोलिकोदण्डमृगेष वायौ। मीनाजकुस्भे निऋंतो विवाहे स्थाप्योडग्निकोणे वृषयुग्मकर्क ।। ९८॥। अन्वयः--अंगनासिहधटंण (स्थिते) सूर्ये शेवे (ईशानकोणे) अलिकोदण्डमृगेष वायो, मीनाजकुम्भे निऋतौ बृषयुग्मकर्क अग्निकोणे विवाहे स्तम्भ: स्थाप्य: ।! ६८ ॥। कन्या, सिह और तुला में सूर्य केस्थित रहते घर के ईशानकोण में; वृश्चिक, धनु, मकर में स्थित रहते वायव्यकोण में; मीन, कुम्भ, मेष में स्थित रहते नऋत्यकोण में और वृष, मिथुन, कक में स्थित रहते आस्नेयकोण में खम्भ गाड़ना चाहिए ।| ९८॥

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