Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 97
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

। पृ्व॑ सिदमाचरेत्त्रिनवषण्मिते अन्वयः--विधोः: बल॑ अवेक्ष्य विवाहजिहितोड़भि: दलनकण्डनं वारक गहाड्भरणविभूषणानि (कार्याणि) अथ वेदिकामण्ड्यान्‌ च विरचयेत्‌ तथा उद्बाहतः पूर्ब॑ व्विनवषण्मिते वासरे इदं (पूर्वोक्तं कम) न आचरेत्‌ ॥ 6६ ॥। विवाह के लिए जो नक्षत्र शुभ कहे गये हैंउन नक्षत्रों मेंतथा वर-कन्या के चन्द्रबल को विचारकर विवाह दिन से पूर्व तीसरे, छठे, नें दिन को छोड़ अन्य दिनों में, आटा पीसना, दाल दलना, चावल कूटना, कलशस्थापन करना, घर और आँगन की सफाई करना, बेदी बनाना, मंडप छवाना आदि कार्य करे !। ९६ ।। बेदी के लक्षण तथा मंडप का उद्बासन हस्तोच्छाया वेदहस्तेः समन्‍्तात्तुल्या वेदी सद्मनो वासभाग । युग्मे घल्न षष्ठहीने रुपत्चसप्ताहे स्थान्मण्डपोद्ासनं सत्‌ ॥ ९७॥

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