Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 96
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--गान्धर्वादिविवाहे त्रिपद्यां अर्कात्‌ (अकंनक्षत्रात्‌) वेदनेत्रगूणेन्दवः कुयुगांगाग्निभ्रामाः (क्रमात्‌) अशुभाः शुभा: (स्मृता:) ॥ &५॥। गान्धर्वादि विवाह में सूर्य के नक्षत्र से चार नक्षत्र अशुभ, फिर दो नक्षत्र शुभ, फिर तीन नक्षत्र अशुभ, फिर एक नक्षत्र शुभ, फिर एक नक्षत्र मुहत्तचिन्तामणि १५० अशुभ, फिर चार नक्षत्र शुभ, फिर छः नक्षत्र अशुभ, फिर तीन नक्षत्र शुभ, फिर एक नक्षत्र अशुभ, फिर तीन नक्षत्र शुभ होते हैं। ऐसे ही त्रिपदीचक्र में भी ये नक्षत्र क्रम से अशुभ और शुभ होते हैं ।| ९५॥ सूर्य के नक्षत्र सेअशुभ और शुभ नक्षत्र विवाह से पूर्व होनेबाले कार्यों का मुह॒त्त विधोबंलमवेक्ष्य वा.दलनकण्डनं वारक गृहांगणविभूषणान्यथ च वेदिकामण्डपान्‌ । विवाहविहितोड्शिविरचयेत्तथोद्राहतो न बासरे ॥ ९६॥

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