। सिंह राशि को छोड़ अन्य सब राशियाँ मनुष्य राशियों के अर्थात् मिथुन, कम्या, तुला के वश में हैं; जल राशियाँ अर्थात् कर्क, मकर, कुम्भ, मीन तो मनुष्य राशियों के भक्ष्य ही हैं; वृश्चिक राशि को छोड़ अन्य सब राशियाँ सिंह राशि के वश में हैं और मेष, वृष, धनु तथा जलचर राशियों का परस्पर वश्यावश्यत्व मनुष्यों के व्यवहार से जानना चाहिए ।। २३ ॥। ताराक्ट कन्यकक्षाद्दरभ॑ यावत्कन्याभं वरभादपषि | गणयेन्नवहच्छेषे त्रीष्वद्रिभमसत्स्मृतम् ॥॥ २४॥। अन्वयः--कन्यकक्षात् वरभं यावत् गणयेत्ु, अपि (तथा) वरभात्, कंन्याभं यावत् गणयेत् (ततः) नवहृच्छंष त्रीष्वद्विभ असत् स्मृतम् ।। २४ ॥। कन्या के जन्मनक्षत्र से वर के जन्मनक्षत्र तक, और वर के जन्मनक्षत्र से कन्या के जन्मनक्षत्र तक अलग-अलग गिनकर जितनी संख्या हो उसमें अलग ही अलग नव का भाग दे यदि तीन, पाँच या सात शेष रहें तो वरकन्या ' के अशुभकारक होते हैं। यथा कन्या के जन्मनक्षत्र अश्विनी से वर के जन्मनक्षत्र चित्रा तक गिना, तो चौदह संख्या हुईं । इसमें नव का भाग दिया तो शेष पाँच रहे । ये वर के अशुभकारक हुए। ऐसे ही वर के जन्मनक्षत्र से कन्या के जन्मनक्षत्र तक जानों ॥ २४ ॥
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