अन्वयः--तक्न प्रश्नलग्नक्षणे चेत् स्वेच्छया यादृशापत्ययुक् कामिनी आत्रजेत् तदा कन्यका वा सुतः तादुशापत्यं अस्या: पण्डिते: विनिदिश्यते ।। ८ ॥। *व्रतखण्ड में इसका विधान लिखा है। [ज्ञानभास्करमामक ग्रन्थ में इसका विधान लिखा है। +विवाहित पति को छोड़ दूसरे के साथ विवाह करना । १4 $अत 4'सा++५तककृलनक लक कक --कन-सका सा क-क७उत्थान ३०३ कलर सनक. ल्------लमल>>क+ कक #+++ न,कक ककेक ०.७३१७७ विवाह प्रकरण १०३ प्रश्नमुहृत्ते मेंजेसी सन््तान लिये हुई कोई स्त्री या कन्या ज्योतिषी के समीप अपनी .इच्छा से आ जाय वैसी ही प्रथम सन््तान उस कन्या के होती है जिसके विवाह का प्रइन हो । कन्या लेकर आवे तो कन्या और पुत्र लेकर आवे तो पुत्र होता है | ८॥। प्रश्नकाल में साधारण शुभाशुभ निमित्त शद्भभेरीविषच्ची रवम॑ड्रल॑ जायते वंपरीत्यं तदा लक्षयेत् । वायसो वा खरः हवा श्वूगालो5पि वा प्रइनलग्नक्षणे रौति नादं यदि ॥ ९॥
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