Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 67
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

। धनु-मीनादि राशियों में सूर्य केस्थित रहते द्वितीयादि सम तिथियाँ दग्धसंज्ञक होती हैं, अर्थात्‌ धनु और मीन राशि में सूर्य केस्थित रहते द्वितीया, वृष और कुम्भ राशि में सूर्य के रहते चतुर्थी, कर्क और मेष राशि में सूर्य केरहते षष्ठी, कन्या और मिथुन राशि में सूर्य के रहते अष्टमी, सिह और वृश्चिक राशि में सूर्य केरहते दशमी तथा मकर और तुला राशि में सूये केरहते द्वादशी तिथि दग्धा होती है। दग्धा तिथि सें विवाहादि शुभ काम न करना चाहिए ॥।| ६६ ॥। दंग्धातिथिचक्र धनु-मीन वृष अप कर्क ह अ ४ मेष मिथुन ््‌ एप मह क सिह वृश्चिक | १० जामित्र दोष लग्नाच्चन्द्रान्मदन भवनगे खेटे न स्थादिह परिणयनम्‌ । किवा बाणाशुगमितलवगे जामित्र स्थादशु भकरमिदम्‌ ॥ ६७॥

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