Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 102
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

बृहस्पति के दिन सूर्यास्त होने केबाद और शनेवचर के दिन सूर्यास्त होने के पूर्व गोधुलि शुभ होती है। बृहस्पति के दिन सूर्यास्त से पूर्व अद्वेयाम दोष और शर्नइचर के दिन सूर्यास्त के बांद कुलिक दोष रहता है, इसलिए इन दोनों कालों की गोधूलि निषिद्धि होती है। लग्न से आठवें या छठे स्थान में अथवा लग्न में चन्द्रमा के स्थित रहते कन्या की न्कगा द् विवाह प्रकरण १५३ मृत्यु तथा सातवें या आंठवें स्थान में अथवा लग्न में मंगल के स्थित रहते वर की मृत्यु होती है, इसलिए गोधूलिकाल में ऐसा लग्न निषिंद्ध होता है । लग्न से ग्यारहवें, दूसरे या तीसरे स्थान में चन्द्रमा के स्थित रहते कन्या और वर दोनों को सौख्य होता है, इसलिए गोधूलिकाल में ऐसा लग्न श्रेष्ठ होता है ॥ १०१ ४ सूर्य की स्पष्टगति मेषादिगेःकेंषष्टशरा ५८ नागाक्षा: ५७ सप्तेषवः ५७ सप्तदरा ५७ गजाक्षाः: ५८ । गोउक्षा: ५९ खतर्काः ६० कुरसाः ६१ कुतर्काः ६१ क्वद्भानि ६१ षष्टि ६० नंवपञ्च ५९ भुक्ति: ॥ १०२ ॥

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