Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्वय:--मे घादिगे अर्क अष्टशरां: नगाक्षा: सप्तेषव:, सप्तशरा:, गजाक्षा:, गो5क्षा:, खतर्का:, कुरसा:, कुतर्का:, क्वंगानि, षष्टि:, नवपञ्च, भुक्ति: ॥ १०२ ।। मेषादि बारह राशियों में इस क्रम से सूयें की ५८। ५७ । ५७ | ५७। ५८५। ५९। है १०२ ॥ ६०। ६१। ६१। ६१। ६०। ५९। कला गति होती सुर्यस्पष्ट करने की रीति तिनिध्ना खबघट ६० ह॒ता। संक्रान्तियातघस्राद्यगं लब्धेनांशादिना योज्यं यातकक्ष॑ स्पष्टभास्कर: ॥ १०३ ४ अन्वयः--संक्रान्तियातघस्राद्यं: गति: निघ्ना खषट्हता लब्धेन अंशादिना यातत्ष योज्यं, स स्पष्टभास्कर: स्यात् ॥ १०३ ॥
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