Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 104
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

। जिस दिन जितने दण्ड-पल पर सूय की संक्रान्ति लगी हो उस दिन से इष्टकाल पर्यन्त जितने दण्ड-पल हों उनको पूर्व कही हुई कलारूप गति से गुणकर उसमें साठ का भाग दे । जो कुछ अंशादि लब्ध हों उसमें बीती हुई संक्रान्ति की राशि जोड़ दे तो तात्कालिक सूर्य स्पष्ट होता है। उदाहरण--यथा संवत्‌ १९४९ माघ कृष्ण दशमी बृहस्पतिवार को १२ दण्ड ६ पल पर मकर की संक्रान्ति लगी और माघ कृष्ण त्रयोदशी रविवार को २४ दण्ड ६ पल- पर सूर्य स्पष्ट करता है। इसलिए संक्रान्तिकाल से इधष्टकाल तक बीते हुए ३ दिन १३ दण्ड ०० पल को पूर्व कही हुई मकर संक्रान्ति की ६० कलारूप गति से गुणकर उसमें ६० का भाग देने से ३ द >> सिआजनन 9८ 24822चचआ «4७833%2>«« ४42: १५४ मुहत्तचिन्तामणि अंश १३ कला ०० विकला लब्ध हुए । इनमें बीती हुई धनु संक्रान्ति द क्‍ | क्‍ क्‍ | | की. . नवीं राशि जोड़ी गई, तब ९ । ३। १३ । ०० हुए । यही तात्कालिक स्पष्ट सूर्य हुआ ॥। १०३ ॥। लग्नधटिकासाधना्थ लग्नभुक्तांशसाधन तनोरिष्टांशकात्त्र नवांशा :उकदशसंगुणाः । रामाप्ता लब्धमंशाद्य द दिसाधने ॥ १०४ ॥

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