Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 6 · · Verse 75
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

। चोर और रोगबाण रात्रि में, राजबाण दिन में, अग्निबाण सब काल में और मृत्युबाण प्रातः: तथा सायद्छाल की संध्याओं में शुभ नहीं होता । शनैदचर में राजबाण, बुधवार में मृत्युबाण, मझ्भल में अग्नि और चोर- बाण, रविवार में रोगबाण वर्जनीय है । यज्ञोपवीत, घर का छवाना, राजा की सेवा अर्थात्‌ नौकरी इत्यादि, सवारी करता और विवाह, इन पाँचों कार्यों मेंक्रम सेरोगबाण, अग्निबाण, -राजबाण, चोरबाण और मृत्युबाण त्यागना चाहिए, अर्थात्‌ यज्ञोपवीत में रोगबाण, घर छवाने में अग्निबाण, राजा की सेवा में राजबाण, सवारी में चोरबाण और विवाह में मृत्युबाण त्यागना चाहिए ।। ७४ ।। ग्रहों की दृष्टि वध्याशं त्रिकोण चतुरस्रमस्तं पद्यन्ति खेटाइचरणाभिवृद्धचा । सन्‍्दी गुरुभ सिसुतः परे च ऋमेण संपूर्णदृूशों भवन्ति ॥ ७५॥ अा|ह_्_्छॉॉगगगआआथआथआथओआथआथखथखखथ3वएखएगआओ।!/प।नककिििि नूर विवाहप्रकरण ि १४१ अन्वयः--त्याशं, त्रिकोणं, चतुरख्रं, अस्तं (सप्तमं )खेटा: चरणाभिवृद्धय्या पश्यन्ति, च [तथा] मनन्‍्दः, ग्रुः भूमिसुतः, परे [रविचन्द्रबृधशुक्रा:| क्रमेण सम्पूर्णद्श: भवन्ति ॥ ७५ ॥

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