Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
। (भवन्ति) तु पुनः मृगकुम्भान्तिमभानि सन्ध्ययो: धनु, तुला और वृश्चिक ये लग्नें दो पहर के बाद बहिरी होती हैं । मिथुन, कर्क और कन्या रात्रि में तथा सिंह, वृष और मेष दिन में अन्धी होती हैं। मकर, कुम्भ और मोन प्रात:काल तथा सायंकाल कुबड़ी होती हैं ॥ ८२ ।। पंग्वादि लग्नों काफल दारिद्र्॑ं बधिरतनौ दिवान्धलग्ने वधव्यं शिशुमरणं निशान्धलग्ने । पड-ग्वंगे नेखिलधनानि नाशमापुः सर्वत्राधिपगुरुदृष्टिभिन दोष: ॥ ८३॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.