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Muhurta Cintamani · Chapter 3

16
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All 16 verses

1
विशाखा अथवा कृत्तिका नक्षत्र में शुक्रवार को जो संक्रान्ति होती है, उसका मिश्रा नाम होता है। वह पशुओ
2
दिन-राज्नि के विभाग से संक्रान्तियों काशुभाशुभ फल त्यंशे दिनस्थ नृपतीन्प्रथमे निहन्ति मध्ये द्विजानप
4
शेष संक्रान्तियों केनास घडशीत्याननं चापनुयुक्कन्याझषे. भवेत्‌ । तुलाजौ विषुवं विष्णुपदं॑ सिहालिगोघटे
5
संक्रान्ति का पुण्यकाल संक्रान्तिकालादुभयंत्र नाडिकाः पुण्या सताः षोडशघोडशोष्णगोः । अन्वयः--उष्णगो:
6
आधी रात्रि में होनेवाली संक्रान्ति का पुण्यकाल पूर्ण निशीथे यदि संक्रमः स्यादिनद्वय॑ पुण्यमथोदयास्ता
7
अन्वयः--अरद्धोंदितास्तात्‌ू अकंबिम्बात्‌ू अध: ऊध्व॑ क्रिनाडीप्रमिता सन्ध्या (कथिता) अत्न चेद्याम्यसौ
8
कक, वृष, सिंह, वृश्चिक और कुम्भ संक्रान्ति जिस समय हो उससे पूर्व सोलह दण्ड पुण्यकाल होता है । तुला औ
9
अन्वयः--अयनांशा: खरसाहताः च स्पष्टाकंगत्या विहता: (लब्धेः) दिनादे: मेषादितः प्राक चलसंक्रमाः स्युः,
10
नक्षत्रों कीसम, बृहत्‌, जघन्य संज्ञा सम॑ मृदुक्षिप्रवसुश्रवोग्निमघात्रिपूर्वाल्पभ॑ बृहत्स्यात्‌ । ध्
11
जघन्यसंज्ञक नक्षत्रों:में संक्रान्ति हो तो पन्द्रह मुहर्त्त, बृहत्संज्ञक नक्षत्रों में संक्रान्ति हो
12
कक की संक्रान्ति यदि रविवार को हो तो दश, सोमवार को बीस, मंगल को आठ, बुधवार को बारह, बृहस्पति को अठार
13
तैतिल, नाग और चतुष्पद करण में सोते हुए; गर, वर्णिज, भद्रा, बव और बालव में बैठे हुए; किस्तुष्त, शैकुन
14
अंन्वयः--बवतः [बवमारभ्य | रखे: संक्रम (सति) (क्रमात) सिंहव्याप्रवराहरासभगजा: द्विषद्घोटका: श्वा अजः
18
॥ अन्वयः--संक्रान्तिधिष्ण्याध रधिष्ण्यत: त्रिभे स्वभे गमनं निरुक्‍्तम्‌, ततः अद्ुभे सुखम्‌, (ततः) त्
19
सूर्य केबली रहते अथवा रविवार को राजा का दशशन, चन्द्रमा के बली रहते अथवा सोमवार को सब कार्य, मज्भल के
20
अधिकमास और क्षयमास का निर्णय स्पष्टाकसंक्रान्तिविहीन उक्तो मासो5धिमास: क्षयमासकस्तु । द्विसंक्रमस्तत