अधिकमास और क्षयमास का निर्णय स्पष्टाकसंक्रान्तिविहीन उक्तो मासो5धिमास: क्षयमासकस्तु । द्विसंक्रमस्तत्र विभागयो: स्तस्तिथेहि मासौ प्रथमान्त्यसंज्ञौं ॥| २०॥ अन्वयः--स्पष्टाकंसंक्रान्तिविहीन: मास: अधिमास: उक्तः, तु (तथा) द्विसंक्रम: मास: क्षयमासकः (स्यात् ) तत्न तिथे:ः विभागयो: प्रथमान्त्यसंज्ञौ मासौ स््त: | २० ॥। शुक्लपक्ष की परीवा से लेकर अमावास्या पर्य॑न्त चान्द्रमास होता है। जिस चान्द्रमास में स्पष्ट सूर्यसंक्रान्ति न होवह मास अधिमास अर्थात् मलमास कहा जाता है और जिस मास में स्पष्ट सूर्य की दो संक्रान्तियाँ हों वह क्षयमास कहा जाता है। क्षयमास में तिथि के पूर्वार्द्ध उत्तरार्द्ध भागों के सम्बन्ध सेपहिला और दूसरा मास जानना चाहिए अर्थात् उस एक ही क्षयमास में दो मास माने जाते हैं। शुक्लपक्ष को पहिला और क्ृष्णपक्ष को दूसरा मास । इति भुहृत्तचिन्तामणो संक्रान्तिप्रकरणं समाप्तम् ॥ ३॥
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