Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
तैतिल, नाग और चतुष्पद करण में सोते हुए; गर, वर्णिज, भद्रा, बव और बालव में बैठे हुए; किस्तुष्त, शैकुनि और कौलव में खड़े हुए सूर्य संक्रान्ति करते हैं । सोते हुए सूर्य अन्नादि की महँगी और अवषेणकारक होते हैं, बेठे हुए सूर्य सम अर्थात् इष्टानिष्ट कुछ नहीं करते और खड़े हुए सूर्य श्रेष्ठ अर्थात् अन्नादि की सस्ती और वर्षा करते हैं ।। १३ ॥।
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