Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अन्वयः--अरद्धोंदितास्तात्ू अकंबिम्बात्ू अध: ऊध्व॑ क्रिनाडीप्रमिता सन्ध्या (कथिता) अत्न चेद्याम्यसौम्ये अयने (संक्रमण भवतः) तदानी परपूर्वंधस्रौ प्ण्यौ सस््त: | ७ ।। सू्ये का आधा बिम्ब उदय होने से पूर्व॑तीन दण्ड प्रातः सन्ध्या और आधा बिम्ब अस्त होने के बाद तीन दण्ड सायं सन्ध्या जानना चाहिए । यदि प्रातःसन्ध्या में कके संक्रान्ति होतो सूर्योदय के अनन्तर सम्पूर्ण दिन पुण्यकाल और यदि सायंसन्ध्या में मकर संक्राति हो तो सूर्यास्त से पूर्व सम्पूर्ण दिन पुण्यकाल होता है ॥| ७ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.