Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
नक्षत्रों कीसम, बृहत्, जघन्य संज्ञा सम॑ मृदुक्षिप्रवसुश्रवोग्निमघात्रिपूर्वाल्पभ॑ बृहत्स्यात् । ध्रुवद्विदेवादितिभ जघन्यं सार्पाम्बुपाद्ाइ्निलज्ञाक्रयाम्यम् ॥ १०॥ अन्वयः--मृदुक्षिप्र वसुश्रवो5ग्निमघातिपूर्वास्रपभ सम॑ स्थात्, ध्रुवद्विदवादितिभं बृहत् स्थात्, सार्पाम्बुपादनिलशाक्रयाम्यं जघन्यं स्थात् ।। १० ॥ मृगशिरा, रेवती, अनुराधा, चित्रा, अदिवनी, पुष्य, हस्त, धनिष्ठा, श्रवण, कृत्तिका, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़, पूर्वाभाद्रपद और मूल नक्षत्र की सम संज्ञा, रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़, उत्तराभाद्रपद, विशाखा और पुनवंसु की बृहत्संज्ञा तथा आइलेषा, शतभिष, आर्द्रां, स्वाती, ज्येष्ठा और भरणी की जघन्य संज्ञा है ॥॥। १०॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.