Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 3 · · Verse 10
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

नक्षत्रों कीसम, बृहत्‌, जघन्य संज्ञा सम॑ मृदुक्षिप्रवसुश्रवोग्निमघात्रिपूर्वाल्पभ॑ बृहत्स्यात्‌ । ध्रुवद्विदेवादितिभ जघन्यं सार्पाम्बुपाद्ाइ्निलज्ञाक्रयाम्यम्‌ ॥ १०॥ अन्वयः--मृदुक्षिप्र वसुश्रवो5ग्निमघातिपूर्वास्रपभ सम॑ स्थात्‌, ध्रुवद्विदवादितिभं बृहत्‌ स्थात्‌, सार्पाम्बुपादनिलशाक्रयाम्यं जघन्यं स्थात्‌ ।। १० ॥ मृगशिरा, रेवती, अनुराधा, चित्रा, अदिवनी, पुष्य, हस्त, धनिष्ठा, श्रवण, कृत्तिका, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़, पूर्वाभाद्रपद और मूल नक्षत्र की सम संज्ञा, रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़, उत्तराभाद्रपद, विशाखा और पुनवंसु की बृहत्संज्ञा तथा आइलेषा, शतभिष, आर्द्रां, स्वाती, ज्येष्ठा और भरणी की जघन्य संज्ञा है ॥॥। १०॥

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