HomeLibraryVivaha VrindavanaCh.6 · Chandra Bala (Moon Strength)
Vivaha Vrindavana · Chapter 6

Chandra Bala (Moon Strength)

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1
कन्यादान के लिये वर पात्रमात्र है! इस अभिप्राय से कितने आचार्य वर का चन्द्रबल नहीं देते हैं। परञ्च इ
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यदि ऐसा ही है कि — 'प्रतिग्राही होने से पात्र मात्र समझ कर वर का चन्द्रबल नहीं देखा जाय' — तो फिर —
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विवाहकालिक लग्नगत नवांश यदि अपने स्वामी से युक्त-दृष्ट न हो तो वर का नाशकारक होता है। तथा चन्द्रमा औ
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चन्द्रमा के क्षीण रहने पर मंगलादि ग्रहों के उत्तम स्थान में होने से भी पुरुष का भविष्यफल नाशवान् होत
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धर्म-अर्थ-काम तीनों के मालिक भी पुरुष चन्द्रबल नहीं पाता है, और कन्या (जिसका दान किया जाता है वही) य
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यदि ऐसा कहो कि — चन्द्रमा स्त्री-ग्रह है इसलिये स्त्री के अनुकूल ही बल देता है? — तो फिर जन्म समय मे
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जातक शास्त्र ने भी पुरुषों के फल में सुनफा-अनफा आदि योगों में चन्द्रमा को ग्रहण किया है। अर्थात् चन्
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पति के विदेश जाने पर अथवा रुग्ण होने पर तोलिलि मुनि स्त्री को कार्यकारिणी कहे हैं। अस्तु ऐसा हो सकता
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कृष्णपक्ष में चन्द्रमा में केवल क्रूरता होती है। अमावस्या में सूर्य के साथ अस्त होने पर वह सर्वथा नष
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दुर्बल भी अपना पति समीप में रहता है तो स्त्री उसके इच्छानुसार ही कार्य करती है। इसी प्रकार तारा भी च