Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
चन्द्रमा के क्षीण रहने पर मंगलादि ग्रहों के उत्तम स्थान में होने से भी पुरुष का भविष्यफल नाशवान् होता है — ऐसा शुक्र-शोनकादि आचार्यों ने कहा है। इत्यादि चन्द्रमा से उपरोक्त फल को जो मानते वे वर का चन्द्रबल भी क्यों नहीं स्वीकार करते हैं? अर्थात् उनको चन्द्रबल मानना ही चाहिये। और जिनके मत में पुरुष की जन्मराशि से उपचय स्थान में सूर्य शुभ है — वह तो हमारा भी इष्ट ही है।
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