Vivāha Vṛndāvana
Chapter 6 · Chandra Bala (Moon Strength) · Verse 11
Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi

दुर्बल भी अपना पति समीप में रहता है तो स्त्री उसके इच्छानुसार ही कार्य करती है। इसी प्रकार तारा भी चन्द्रमा के अनुकूलता प्राप्त होने पर चन्द्रमा ही की पक्षपातिनी होती है। अर्थात् कृष्णपक्ष में भी चन्द्रमा प्रतिकूल रहता है तो तारा भी अशुभ फल को ही देती है। और चन्द्रमा के शुभ स्थान स्थित होने पर शुभ फल देती है। इससे सिद्ध हुआ कि कृष्णपक्ष में भी चन्द्रमा को अनुकूल स्थान में ही रहना चाहिये।

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