HomeLibraryVivaha VrindavanaCh.2 · Kala Mimamsa Prakarana (Deliberation on Time/Timing)
Vivaha Vrindavana · Chapter 2

Kala Mimamsa Prakarana (Deliberation on Time/Timing)

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1
प्राणियों का जन्मलग्न शरीर, और चन्द्रराशि मन कहा गया है। मैत्री मन में ही होती है, शरीर में नहीं, इस
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'यदि जन्मकालिक चन्द्रराशि (जन्मराशि) से ही मेलापक विचारा जाता है तो उससे भी सूक्ष्म चन्द्रनवांश से क
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सूर्य ६ मास (कर्क से धनु पर्यन्त) दक्षिण दिशा को चलते हैं, उसी को दक्षिणायन वेद ने भी कहा है। दूसरा
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विवाहविहित दिन-नक्षत्र नहीं प्राप्त होने पर विहित नक्षत्र के मुहूर्त में क्या विवाह नहीं कहा है? अवश
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सूक्ष्मता के लिये प्रत्येक क्षण में तर्क-वितर्क से तत्तत् समय के अनेक कल्पनाओं से अव्यवस्थिति हो जाय
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संसार में ऐसे बहुत लोग हैं जो एक नक्षत्र, एक तिथि में उत्पन्न हुए भी भिन्न भिन्न फल के भागी हैं। इसल
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राशि से नवांश सूक्ष्म कहा गया है। सूक्ष्मता के विचार में नवांश से भी द्वादशांश सूक्ष्म, द्वादशांश से
8
काल का वह प्रदेश अत्यन्त सूक्ष्म है जिससे सब जन्तुओं के फल भिन्न भिन्न देखने में आता है, उस सूक्ष्म
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इस प्रकार मूल के अनुकूल रहने पर यदि सूक्ष्म भाग भी लब्ध हो जाय तो सर्वथा सिद्ध है। और यदि मूल (स्थूल