Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
सूर्य ६ मास (कर्क से धनु पर्यन्त) दक्षिण दिशा को चलते हैं, उसी को दक्षिणायन वेद ने भी कहा है। दूसरा प्रमाण यह है कि वसन्तादि ऋतु भी सूर्य की राशि संक्रान्ति से ही अपनी अपनी भंगी (चिह्न) को धारण करती है। नवांश से नहीं। अर्थात् सूर्य जब मीन में जाता है तभी वसन्त का चिह्न (वृक्षादिकों में नव पल्लवादि होना) दृश्य होता है, मीन के नवांश में जाने से नहीं, अतः राशिवश ही मेलकविधि समुचित है।
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