Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
इस प्रकार मूल के अनुकूल रहने पर यदि सूक्ष्म भाग भी लब्ध हो जाय तो सर्वथा सिद्ध है। और यदि मूल (स्थूल = राशि, नक्षत्र) ही नहीं अनुकूल हो, तब तो सूक्ष्म भाग के दुर्गम होने के कारण सूक्ष्म का भी लाभ न होगा — तब दोनों ही नष्ट हो जायेंगे। काल की मीमांसा (विचार) से यही परिणाम हुआ। अतः व्यवहार में स्थूल का ग्रहण करना ही सिद्ध हुआ।
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