HomeLibraryVivaha VrindavanaCh.12 · Graha Bhava Kundali (Planetary Effects by House Position in the Marriage Chart)
Vivaha Vrindavana · Chapter 12

Graha Bhava Kundali (Planetary Effects by House Position in the Marriage Chart)

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1
विवाह लग्न में गुरु हो तो स्त्री को चिरजीविनी बनाता है, शुक्र हो तो अत्यन्त काम और सौभाग्य से युक्ता
2
विवाह लग्न से द्वितीय भाव में शुक्र, चन्द्रमा, बृहस्पति और बुध ये कन्या को अत्यन्त धनवती बनाते हैं।
3
तृतीय भाव में सूर्य और शनि हों तो धनवती, बृहस्पति हो तो अल्प धनवाली, चन्द्रमा हो तो सुभगा, मंगल बुध
4
विवाह लग्न से चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो स्त्री को दारिद्र्य, मंगल हो तो भग में आघात, बृहस्पति, शुक्
5
शुक्र, गुरु, बुध ये पञ्चम भाव में हो तो स्त्री को योग्य पुत्रवाली बनाते हैं। रवि हों तो पुत्रघातिनी,
6
विवाह लग्न से षष्ठ भाव में चन्द्रमा हों तो कन्या की मृत्यु, बुध हों तो शत्रु से भय, सूर्य हों तो विज
7
विवाह लग्न से सप्तम भाव में बुध हो तो स्त्री को बन्ध्या, चन्द्रमा हो तो सौत के दुख से पीडिता, शनि हो
8
विवाह लग्न से अष्टम स्थान में शुक्र, चन्द्र, वृहस्पति हों तो स्त्रियों के मृत्युकारक होते हैं। सूर्य
9
विवाहलग्न से नवम भाव में बुध, गुरु, शुक्र हों तो अत्यन्त सौभाग्यवती और सरल हास्य से स्वामी के हृदय म
10
विवाहलग्न से दशमस्थान में शनि हो तो कन्या नियम से शौच (पवित्रता) रखनेवाली नहीं होती है। चन्द्रमा हो
11
विवाह लग्न से ११ स्थान में स्थित सूर्यादि सब ग्रह स्त्रियों को रत्नाभरण, वस्त्र, धन आदि भोग सुख देते
12
विवाह लग्न से द्वादश स्थान में शुभग्रह (चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र) हों तो स्त्री को समुचित व्यय (धर्म
13
इस प्रकार मुनिजनों के सम्मत प्रति राशिगत ग्रहों के भविष्य शुभाशुभ है जिसमें ऐसे पूर्वोक्त फलों को वि