Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
विवाहलग्न से नवम भाव में बुध, गुरु, शुक्र हों तो अत्यन्त सौभाग्यवती और सरल हास्य से स्वामी के हृदय में केलि करनेवाली कन्या होती है। सूर्य, शनि, मंगल ये हों तो कपट स्वभाववाली, और चन्द्रमा नवम भाव में हो तो स्त्री को कन्या सन्तानवाली बनाता है ॥ ९ ॥
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