Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
विवाहलग्न से दशमस्थान में शनि हो तो कन्या नियम से शौच (पवित्रता) रखनेवाली नहीं होती है। चन्द्रमा हो तो दूसरों के कार्य से अत्यन्त खिन्न शरीर वाली होती है। मंगल हो तो शाकिनी के समान (मांसादि भक्षण करने वाली), रवि हो तो दुष्ट स्वभाववाली, बुध हो तो शुद्रकर्म को करनेवाली और गुरु, शुक्र हो तो पूर्ण पुण्य और सम्पत्ति वाली होती है ॥ १० ॥
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