HomeLibraryVivaha VrindavanaCh.13 · Graha Yoga Bala Abala Prakarana (Strength and Weakness of Planetary Combinations)
Vivaha Vrindavana · Chapter 13

Graha Yoga Bala Abala Prakarana (Strength and Weakness of Planetary Combinations)

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लग्न और चन्द्रमा दोनों चर राशि में हों उन पर शुक्र की दृष्टि हो और यायी ग्रह बलवान होकर केन्द्र में
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विवाह समय पुरुषग्रह (गुरु-रवि-मंगल) बली हों तो स्त्री को स्वामी प्रिय होता है । तथा स्त्री ग्रह बली
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सप्तमेश स्त्रियों का स्वामी, सूर्य श्वशुर और शुक्र सास है। ये निर्बल हों तो पति आदि के अशुभफल और बली
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चन्द्र, रवि, भौम और लग्नेश ये शत्रुगृह, नीचराशि में वा अस्त हों तथा सप्तभाव निर्बल हो तो स्त्री सन्त
10
लोक में तृतीय शुक्र की शुभार्थ रेखा होती है। तथा दशम मंगल और द्वादश शनि भी लग्न के मङ्गलकारक नहीं मा
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शुक्र, बृहस्पति, बुध इनमें से एक भी ९, ५, १, ४, १० भावगत होकर मित्र की राशि में हो और पूर्ण दशा से च
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जिस नवांश में चन्द्रमा हो उससे ५४ वाँ नवांश में यदि पापग्रह हो तो यह पूर्णजामित्रदोष परिपूर्ण भी अन्
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जैसे अग्नि से जले हुए बीज विफल होते हैं उसी प्रकार कितने (निर्बल ग्रहों के) योग प्रत्यक्ष रहने पर भी
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इस प्रकार जो ज्योतिषी प्रतिकूलकारक (दुष्ट फलप्रद) ग्रह, भाव, नवांश आदि के स्थानों पर दृष्टि देकर समस