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Muhurta Cintamani
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Ch.10 · Chapter 10
Muhurta Cintamani · Chapter 10
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4 verses
1
उत्तरायण सूर्य के रहते तथा बृहस्पति, शुक्र और चन्द्रमा ग्रहों के उदित रहते और मंगल, सूर्य, तात्कालिक…
2
नक्षत्र तथा लग्नशुद्धि शाक्रश्नवः क्षिप्रमृदु श्र्वोडुभि: शीषोंदये वोपचये शुभे तनों। पापंस्त्रिषष्ठा…
3
पापग्रह लग्न में होतो रोग, आठवें स्थान में हो तो मृत्यु, पाँचवें स्थान में हो तो पुत्र-क्लेश, दूसरे…
4
जिस राजा के अभिषेककाल में बृहस्पति लग्न में या नवें, पाँचवें स्थान में, मंगल लग्न से छठे और शुक्र दश…
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