Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
गण्डान्त, वेशता (विषकुम्भ), और संक्रान्ति से पूर्व-पश्चात् १६-१६ घड़ी, अर्धयाम, व्यतीपात, भद्रा (विष्टि), कुलीक इन दोषों से लग्न भंग कहा गया है। इन दोषों में कुलिक का मान कहते हैं — १४ में २-२ घटाने से (अर्थात् १४, १२, १०, ८, ६, ४, ये क्रम से) सूर्यादिवारों में कुलिक होते हैं। और दिन के मुहूर्त संख्या में १ घटाने से रात्रि की मुहूर्त संख्या होती है। तथा तिथि, नक्षत्र, वार सम्बन्धी जो अन्य दोष हैं वे नेपाल, खश और हूण देश से भिन्न देशों में त्याज्य नहीं हैं ॥ १२ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.