Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
वारप्रवेश समय से इष्ट घड़ी को दूना करके उसमें ५ का भाग देने से लब्धि काल होरा होती है, इसमें भी सूर्य, शुक्र इत्यादि पूर्वोक्त रीति से होरापति की संख्या समझना। यदि दोनों प्रकार से पापग्रह की होरा आवे और लग्न में अधिक पापग्रहों का वर्ग पड़े तो अत्यन्त दोष होता है। अतः उस लग्न का सर्वथा त्याग देना चाहिये ॥ ११ ॥
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