Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
ग्रह वा भाव जिसका षड्वर्ग विचार करना हो उसके राशि को छोड़कर केवल अंश को १, १, ३, २ से गुनाकर पृथक् पृथक् १५, १०, १०, ५ से भाग देने से क्रम से होरा, द्रेक्काण, नवांश और द्वादशांश होते हैं। तथा जिसकी जो राशि है वही उसका गृह कहाता है। और समराशियों में — शुक्र, बुध, बृहस्पति, शनि और मंगल के क्रम से ५, ७, ८, ५ और ५ अंश तथा विषम राशियों में उत्क्रम से (अर्थात् मंगल, शनि, बृहस्पति, बुध और शुक्र के ५, ५, ८, ७ और ५ अंश) त्रिंशांश होते हैं। यह षड्वर्गी (षड्वर्ग) है ॥ १३ ॥
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