Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
श्रीपति आदि अन्याचार्य गतगम्यक्षेत्र हेतु (पादवेध) को छोड़कर समस्त नक्षत्र को ही त्याज्य कहे हैं। क्योंकि वे सन्ध्योदित (अर्थात् सूर्य से १४वाँ) चन्द्रनक्षत्र हो त्याज्य कहे हैं, वही युक्ति एकार्गल विद्ध नक्षत्र के त्याज्यत्व में भी है।
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