Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
व्याघातादि दुष्टयोग की संख्या में १ जोड़कर आधा करने से जो संख्या हो वही शीर्ष नक्षत्र होता है। यदि आधा करने से शेष युत संख्या हो तो उसमें १२॥ साढ़े तेरह जोड़ने से शीर्ष नक्षत्र होता है। इस प्रकार चन्द्रमा अर्गलायुक्त हो तो विवाहादि मंगल कार्य का नाश होता है।
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