Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
एक ऊर्ध्वाधर रेखा को १३ तिरछी रेखा से वेध करने पर खाजूर नामक चक्र होता है। इस चक्र में आगे कहे हुए शीर्ष नक्षत्र से आरम्भ कर अभिजित् सहित २८ नक्षत्रों का न्यास करने पर यदि सूर्य और चन्द्रमा एक रेखा में पड़े तथा एक के नक्षत्र का गत और दूसरे का गम्य तुल्य हो तो यह नयनार्गला (परस्पर एकार्गला) नामक दोष होता है।
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