Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जो चन्द्रबिम्बस्थ कलंकलेखा को न देखे, तथा ध्रुव, नक्षत्रमण्डल, मातृतारकामण्डल न देखे, जिसका पैर कीचड़ आदि में खण्डित देखने में आवे, तथा जल में कफ फेंकने से डूब जाय इस प्रकार का आसन्न मृत्युवाला वर का कन्यादान के लिये नहीं वरण करना चाहिये ॥ ५ ॥
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