Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
यदि प्रारब्ध ही फलीभूत होता तो कृषि वाणिज्य आदि के उपायों में लोग यत्न क्यों करते हैं; लोग ही नहीं, श्रुति स्मृति भी लोगों के निषेध और विधि कर्म में क्यों प्रवृत्त हैं। इससे सिद्ध हुआ कि शुभफल लाभ और पापफल नाश के लिये सदा यत्नशील रहना चाहिये ॥ ४ ॥
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