Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
स्वप्न, शगुन आदि निमित्त, शकुन, पूर्वाजित कर्म, शरीरलक्षण, आगन्तुक (जातक), दिव्य, भौम, आन्तरिक्ष उत्पात, कफ वातादिजन्य शारीरिक दोष का प्रचार, ग्रहों का चार, संवत्सर, मास, दिन, होरा आदि काल और काम्य (ऐहिक चेष्टादि) इत्यादि फल कहने के मार्ग अनेक हैं। अर्थात् अनेक मुनियों ने अनेक प्रकार से फल कहे हैं ॥ २ ॥
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