Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
वर को चाहिये कि--वक्ष्यमाणनिमित्तों से, सामुद्रिकलक्षणों को समक्ष कर कन्या का वरण करे। इसी प्रकार कन्या भी वर का वरण करे। क्योंकि गर्गादिमुनियों ने उत्तरकालीन फल एकही प्रकार का नहीं कहा है, अर्थात् भविष्य फल अनेक प्रकार से होते हैं ॥ १ ॥
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