Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
यदि ऐसा कहा जाय कि — स्वामी के परोक्ष में ही सेना में विरोध होने से वध होता है, स्वामी के समक्ष में नहीं? तो फिर राशीश्वरों (ग्रहों) के कौन स्थान अदृश्य हैं? अर्थात् वे सब को देखते हैं। इसलिये स्वामियों की मैत्री ही विशेष है। यदि स्वामी की मैत्री ही विशेष है तो फिर समसप्तक (कुम्भ-सिंह आदि) राशियों की ग्राह्यता की क्या गति होगी?
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