Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
स्वामियों में विरोध रहने पर नौकरों में यदि मेल भी हो तो वह अमेल (विरोध) ही समझा जाता है। इसलिये राशिमैत्री व्यर्थ ही है — इस प्रकार के प्रश्न में उत्तर यह है कि एक ही राजा की सेनाओं में परस्पर विरोध होने पर क्या वध नहीं होता है?, अर्थात् अवश्य हो जाता है। अतः राशिमैत्री ही में प्रधानता सिद्ध हुई।
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