The last decanates of Simha, Mesha, Dhanus, Tula and Mithuna, the first ones of Dhanus and Mesha, the middle ones of Kanya and Mithuna are termed Ayudha Drekkanas or 'armed' decanates. The middle decanate of Vrischika is called "Pasa" (or noose). The first Drekkana of Makara is called "Nigala" (fetters) decanate. The first decanates of Simha and Kumbha and the middle one of Tula are vulture faced. The last decanate of Vrishabha is a bird (Pakshi) and the first decanate of Karkataka has a face like that of a pig.
इन द्रेष्काणों का स्वरूप बताते हैं। निम्नलिखित द्रेष्काण हैं — राशि | प्रथम द्रेष्काण | द्वितीय द्रेष्काण | तृतीय द्रेष्काण मेष | आयुध | — | चतुष्पाद, आयुध वृष | — | चतुष्पाद | पक्षी मिथुन | आयुध | आयुध | — कर्क | कोलानन | — | सर्प सिंह | गृध्रास्य / चतुष्पाद | — | आयुध कन्या | — | आयुध | — तुला | — | गृध्रास्य | आयुध वृश्चिक | सर्प | पाश | चतुष्पाद धनु | आयुध | — | आयुध मकर | निगड़ | — | चतुष्पाद कुम्भ | गृध्रास्य | — | — मीन | — | — | सर्प फलदीपिका की एक संस्कृत प्रति में द्रेष्काण का स्वरूप वर्णन करने वाले श्लोक १३ और १४ नहीं हैं। अन्य प्रति में सिंह के आद्य (प्रथम) द्रेष्काण को श्लोक १३ में गृध्रास्य कहा है और श्लोक १४ में इसी सिंह राशि के प्रथम द्रेष्काण को चतुष्पाद कहा है। प्रतीत होता है मूल संस्कृत के मुद्रण में कुछ अशुद्धि है। परिभाषाएँ — • आयुध — शस्त्र, या शस्त्र धारण करने वाला • चतुष्पाद — नौपाया (जानवर) • कोलानन — सूअर के मुख वाला • गृध्रास्य — गृध्र के मुख वाला • पाश — जाल, जिसमें किसी को बाँध लिया जावे • पक्षी — परिन्दा • सर्प — साँप • निगड़ — बेड़ी में जकड़ा हुआ जब जन्म के समय उपर्युक्त द्रेष्काण उदित हो तो जातक अधन (धनरहित), क्रूर, निन्द्य (निन्दा के योग्य उसके कर्म हों) तथा दरिद्र होता है। सामान्यतः चर, स्थिर, द्विस्वभाव राशियों में प्रथम, द्वितीय, तृतीय द्रेष्काणों का फल निम्नलिखित है — चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर): शुभ — सम — अधम स्थिर राशि (वृष, सिंह, वृश्चिक, कुम्भ): अशुभ — शुभ — सम द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन): अधम — सम — शुभ उपर्युक्त फल लग्न राशि चर है, स्थिर या द्विस्वभाव — प्रथम द्रेष्काण उदय हो रहा है, द्वितीय या तृतीय यह निश्चित कर कहना चाहिये।
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