If the planets (referred to in sloka 24 supra, i.e., lords of the 9th and 5th) occupy a fixed Rasi or Amsa identical with a Prishtodaya and an Adhomukha Rasi (vide 7—8 supra) along with malefics, the past and the future births of the native should be declared as trees, plants and the like. If otherwise, i.e., if the lords of the 9th and 5th houses occupy a Sirshodaya and an Urdhvamukha Rasi identical with a Chara or moveable Rasi or Amsa with benefics, the birth should be of an animal kind.
(ङ) ऊपर श्लोक २४ में पूर्व जन्म के विषय में बताया है। अब पुनः उसी प्रसंग में कहते हैं कि यदि जिन ग्रहों का ज़िक्र ऊपर श्लोक २४ में किया गया है — वे स्थिर राशि या स्थिर नवांश में हों और साथ ही साथ पृष्ठोदय राशि में भी हों और अधोमुख राशि में भी हों तो जन्म वृक्ष (पेड़), लता (बेल) आदि में हुआ था (नवम भाव के विचार से) या वृक्ष, लता आदि रूप में होगा (पाँचवें भाव के विचार से)। यदि स्थिर नवांश, पृष्ठोदय आदि में न हो तो मनुष्य योनि (मनुष्य शरीर) समझना चाहिये। अर्थात् ऊर्ध्वास्य राशि हो, शीर्षोदय राशि हो, चर राशि, चर नवांश का सम्बन्ध हो तो (नवम का ऐसा हो तो पूर्व जन्म में) मनुष्य ही था; पंचम का ऐसा सम्बन्ध हो तो भविष्य जन्म या पुनर्जन्म में मनुष्य ही होगा। मनुष्य का अर्थ मनुष्य योनि समझना चाहिये — स्त्री या पुरुष दोनों के लिये मनुष्य का प्रयोग किया जाता है। हमारा यह मत है कि पुरुष प्रत्येक जन्म में पुरुष ही होता है — स्त्री प्रत्येक जन्म में स्त्री ही होती है। पुरुष प्राण और योषा प्राण (स्त्री प्राण) की यह विशेषता है।
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