HomeLibraryPhaladeepikaCh.22Verse 3
Phaladeepika
Chapter 22 · kālacakra daśā · कालचक्र दशा · Verse 3
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
मनुः परः सनिर्धनिर्नृपस्तपो वने क्रमात् ।
दिवाकरदिवत्सराः शुभाशुभाप्तिहेतवः
IAST Transliteration
manuḥ paraḥ sanirdhanirnṛpastapo vane kramāt | divākaradivatsarāḥ śubhāśubhāptihetavaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

5, 21, 7, 9, 10, 16 and 4 are the numbers representing the period in years respectively of the seven planets reckoned from the Sun, and are the means (sources) for fixing the good and bad effects.

Hindi

सूर्य के ५ वर्ष (सूर्य की राशि सिंह है — इसलिये सिंह के ५ वर्ष), चन्द्रमा के २१ वर्ष (चन्द्रमा की राशि कर्क है, इसलिये कर्क के २१ वर्ष), मंगल के ७ वर्ष (मंगल की राशियाँ मेष और वृश्चिक हैं — मेष के ७, वृश्चिक के भी ७), बुध के ९ वर्ष (मिथुन के ९, कन्या के भी ९), बृहस्पति के १० वर्ष (धनु के १०, मीन के भी १०), शुक्र के १६ वर्ष (वृष और तुला दोनों के सोलह-सोलह), शनि के ४ वर्ष (मकर और कुम्भ दोनों के चार-चार)। अब जिस राशि की दशा हो — उस राशि और राशि के स्वामी के अनुसार कालचक्र दशा का फल कहा जाता है। इस कारण केवल मेष राशि की दशा या केवल मंगल की दशा कालचक्र में नहीं कही जाती, किन्तु 'मेष-मंगल की दशा' और 'वृश्चिक-मंगल की दशा' कही जाती है। मंगल का प्रभाव दोनों राशियों में समान रहेगा; किन्तु मान लीजिये मेष में बृहस्पति आदि शुभ ग्रह हैं और वृश्चिक में शनि, राहु आदि क्रूर ग्रह हैं, तो मेष-मंगल की दशा अच्छी जायेगी, किन्तु वृश्चिक-मंगल की दशा निकृष्ट साबित होगी।

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