Information regarding one's wealth, vehicles, cloths, ornaments, hoarded goods, triple symphony (union of song, dance and instrumental music), wife, happiness, scents, flowers, sexual intercourse, couch, house, prosperity, pleasure in poetry, addiction to many women, sport, lasciviousness, ministership, charming speech, marriage and festivity should be sought for through Venus.
सम्पत्ति, सवारी, वस्त्र, भूषण, निधि में रखे हुए द्रव्य, तौर्यत्रिक (नाचने, गाने तथा बाजे का योग), सुगन्धि, पुष्प, रति (स्त्री-पुरुष प्रसंग), शय्या (पलंग) और उससे सम्बन्धित व्यापार, मकान, धनिक होना अर्थात् वैभव, कविता का सुख, विलास, मन्त्रित्व (मिनिस्टर होना), सरस उक्ति, विवाह या अन्य शुभ कर्म, उत्सव आदि का विचार शुक्र से करें। विशेष यह है कि यदि पुरुष की जन्मकुण्डली हो तो स्त्री-सुख का विचार भी शुक्र से करना चाहिये — अपनी विवाहिता पत्नी से कैसा सुख है और विवाहिता के अतिरिक्त अन्य स्त्रियों का उपभोग कैसा होगा। जिस तरह श्लोक ५ में बताया गया है कि बृहस्पति पति-कारक है, उसी तरह श्लोक ६ में यह बताया है कि शुक्र स्त्री-कारक है। फलदीपिका के इस अध्याय में जो स्थिर-कारक बताये हैं उनका फलादेश में बड़ा महत्त्व है। जो ज्योतिषी स्थिर-कारक का विचार नहीं करते वह फलादेश में बहुत भूल कर बैठते हैं।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.