The man born in a Dushkriti Yoga will lose his wife, and be addicted to others' wives, will be roaming on the roads unperceived, will suffer from gonorrhea and such other venereal diseases, and trouble from the sovereign. He will be despised by his relations and suffer distress as a result thereof.
यदि सप्तमेश या सातवाँ घर अशुभ ग्रहों से युत-वीक्षित हो और सातवें घर का मालिक दुःस्थान में पड़ा हो तो दुष्कृति योग होता है। ऐसे व्यक्ति को सप्तम स्थान सम्बन्धी सभी कष्ट प्राप्त होते हैं — अपनी पत्नी का वियोग (चाहे वह मर जाय, चाहे उससे अलग रहना पड़े, या रोगिणी हो), दूसरे की स्त्री से रति हो, इसकी इच्छा रहे (हृदय जलता रहे, सुख की प्राप्ति न हो), कष्टमय मंज़िल (सफ़र) करनी पड़े। जातक के बन्धु लोग उसे धिक्कारें — इस कारण उसे शोक प्राप्त हो। राजा या सरकार से पीड़ा मिले। सप्तम स्थान से जननेन्द्रिय का विचार किया जाता है — सप्तम भाव और सप्तमेश दोनों बिगड़े हों तो प्रमेह (सुजाक, आतशक आदि) इन्द्रिय सम्बन्धी एक या अधिक रोग हों।
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