He who is born in a Sarala Yoga will be long-lived, resolute, fearless, prosperous, and will be endowed with learning, children and riches. He will achieve success in his undertakings, overcome his foes, be pure and widely celebrated.
यदि अष्टम भाव का स्वामी छठे, आठवें, बारहवें घर में बैठा हो तो सरल योग होता है। जो सरल योग में पैदा होता है वह दीर्घायु, दृढ़मति (मज़बूत मिज़ाज), निर्भय, लक्ष्मीवान्, विद्या-पुत्र और धन से युत, अपने उद्योग में सफलता प्राप्त करने वाला, निर्मल और शत्रुओं को जीतने वाला, विख्यात पुरुष होता है। मन्त्रेश्वर महाराज के विचार से अष्टम दुःस्थान होने के कारण इसका मालिक भी यदि दुःस्थान में जावे तो उसी प्रकार उत्तम गिना जाता है, जैसे यदि अपना दुश्मन गड्ढे में पड़ा हुआ हो तो इसे उत्तम कहेंगे। वी० सुब्रह्मण्य शास्त्री ने टीका करते हुए लिखा है कि अष्टम भाव पाप ग्रह युत-वीक्षित हो तो भी 'सरल' योग होता है। परन्तु हमारे विचार से अष्टम घर को यदि पाप ग्रह देखें या अष्टम में पाप ग्रह बैठे तो जिस भाव के वे स्वामी हैं उसको तो बिगाड़ेंगे ही, साथ में अष्टम भाव को भी बिगाड़ेंगे। केवल मात्र शनि के सम्बन्ध में यह कहा जाता है कि अष्टम में शनि आय को बढ़ाता है। अष्टम में मंगल तो बहुत ही ख़राब है, गुदा-रोग करता है और मनुष्य को प्रायः कर्ज़दार रखता है। अष्टम में केतु भी गुदा सम्बन्धी रोग देता है जैसे काँच निकलना। इन सब उदाहरणों द्वारा हमारा अभिप्राय यह है कि अष्टमेश दुःस्थान में बैठे अर्थात् छठे या बारह में बैठे तो सरल योग होगा, किन्तु अष्टम भाव में पाप ग्रह का बैठना उत्तम नहीं।
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